Sunday, 16 January 2022

Sher__Poet__Shabnam Firdaus



نہ جانے اس نے کیا کہا تھا کان میں 
کہ اب تلک ہے خوشبو میرے چار سو
شبنم فردوس
न जाने उस ने ‌क्या कहा था कान में
कि अब तलक है खु़श्बू मेरे चार सु
शबनम फ़िरदौस

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Monday, 3 January 2022

Nazm___Lahar_Poet_Shabnam Firdaus

لہر

یہ کل ہی کی تو بات تھی 
اسی جگہہ اسی گھڑی
پون کے مست جھونکے سی 
فضا میں عطر گھولتی 
وہ ہنستی کھلکھلاتی لڑکی
آنکھ جسکی کانچ سی 
کہ جیسے ریڈیم ہو کوئی 
پانیوں پہ چلتے ہوئے
لڑکھڑا کے گر پڑی
مگر پلک جھپکتے ہی
وہ اٹھ کے یوں کھڑی ہوئی 
کہ جیسے کہہ رہی ہو وہ
 نہیں ہے دم کسی میں بھی
اسے کوئی گرا سکے 
کہ اس طرح ہرا سکے 
تو آج کیا ہوا اسے 
گری تو پھر 
اٹھی نہیں
سنبھالا خود کو کیوں نہیں
 یوں لہر سنگ مچل پڑی ؟
فردوس



लहर

ये‌ कल ही की तो‌ बात थी
इसी जगह इसी घड़ी
पवन के मस्त झोंके सी
फिज़ा में इत्र घोलती
वह हंसती खिलखिलाती लड़की
आंखें जिसकी कांच सी
कि जैसे रेडियम हो कोई
पानियों पे चलते हुए
लड़खड़ा के गिर पड़ी
मगर पलक झपकते ही
वह उठ के यूं खड़ी हुई
कि जैसे कह‌ रही हो वह
नहीं है दम किसी में भी
उसे कोई गिरा सके
कि इस तरह हरा सके
तो आज क्या हुआ उसे
गिरी तो फिर 
उठी नहीं
संभाला खु़द को क्यों नहीं
यू लहर स़ग क्यों चल पड़ी?
शबनम‌ फि़रदौस

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