Monday, 26 October 2020

Neeli aankhen

نیلی آنکھیں
کہتے تھے تم
مجھ سے اکثر 
”میں نے
لوکوں سے سنا ہے 
نیلی  آنکھوں والے اکثر 
بے وفا
ہوتے ہیں جاناں “
مسکرا کے
چپ میں رہتی 
دن ,
مہینے , 
سال
بیتے 
کتنے موسم
گزرے لیکن 
جانے ان آنکھوں میں کیوں وہ
ایک ہی موسم ٹھہر گیا
  شبنم فردوس
नीली आंखें

कहते थे तुम
 मुझसे अक्सर 
"मैंने 
लोगों से सुना है 
नीली आंखों वाले अक्सर
बेवफा 
होते हैं जानां"
मुस्कुरा कर 
चुप मै रहती 
दिन , 
महीने,
साल
बीते
कितने मौसम
गुज़रे लेकिन
जाने इन आंखों में क्यों वो
एक ही मौसम ठहर गया है
शबनम फ़िरदौस

Wednesday, 21 October 2020

Bhagwan to patthar k hotey hain

بھگوان تو پتھر کے ہوتے ہیں 

دل کے مندر میں تجھکو 
بھگوان بنا کر رکھا میں نے 
بھول کے سارے جگ کو بس 
دن رات پرستش کی تیری 
اک نظر عنایت ہو تیری ۔۔۔۔۔
منتر بھی خوب پڑھے میں نے
خود اپنا آپ بھی دان کیا 
اور برسوں تک ہے دھیان کیا
اک دن تو میری بھکتی سے 
پگھلے گا دل بھگوان ترا
مائل ہوگا تو میری طرف 
لیکن یہ غلطی میری تھی 
میں بالکل بھول ہی بیٹھی تھی 
اک پتھر کا بھگوان ہے تو۔۔۔۔۔
شبنم فردوس

भगवान तो पत्थर के होते है
दिल के मंदिर में तुझको 
भगवान बनाकर रखा मैंने
भूल के सारे जग को बस
दिन रात परिस्तिश की तेरी 
एक नज़रे इनायत हो तेरी...
मंत्र भी खूब पढ़े मै ने
खुद अपना आप भी दान किया
और बरसों तक है ध्यान किया 
एक दिन तो मेरी भक्ति से
पिघलेगा दिल भगवान तेरा 
मायल होगा तू मेरी तरफ 
लेकिन ये गलती मेरी थी 
मै बिल्कुल  भूल ही बैठी थी
एक पत्थर का भगवान है तू ......
शबनम फ़िरदौस

Friday, 16 October 2020

corona Ek Banwas

کورونا ایک بنواس

بیٹے کی دوسری سالگرہ پر 
جب سے آنے کا سنا تھا 
سوچتی رہتی تھی اکثر 
جس کی خاطر  ہم نے جاناں
ایک مدت بنواس ہے کاٹی  
در در بھٹکے ، منت مانی
رب کی رحمت ہوئی  ہم پر 
چھو کے اس کو دیکھو گے جب  
کیسے تم ری ایکٹ کرو گے
 آنکھ میں ڈب ڈب ہوں گے آنسو 
نظر  چراؤ گے تم مجھ سے  
غلطی سے گر مل گئیں نظریں
میری انکھ میں
  شاید  کوئی
کنکڑ پڑ گیا ہے دیکھو 
کہہ کر بڑھ جاؤگے آگے
توتلے لہجے میں جب تم کو 
بابا کہہ کر بلائے گا
کیسے تم ری ایکٹ کروگے 
جامد ہی  ہو جاؤ گے 
یا سینے سے لپٹا لو گے   
جیون کا وہ سندر لمحہ 
دیکھنے کو بے تاب تھی کب سے 
لیکن اب جو وبا چلی ہے 
آنے کا امکان نہیں ہے
بیٹا مجھ سے 
پوچھ رہا ہے 
بابا کب آئیں گے ماما
کیسے میں اس کو سمجھاؤں 
ابھی بھی شاید باقی ہے 
کچھ مدت بنواس کی اور
شبنم فردوس
25/05/20

कोरोना एक बनवास

बेटे की दूसरी सालगिरह पर
जब से आने का सुन था
 सोचती रहती थी अक्सर
जिसकी खातिर हमने जाना
एक मुद्दत बनवास है काटी
दर दर भटके , मन्नत मानी
रब की रहमत हुई हम पर
छू के उसको देखोगे जब
कैसे तुम रिएक्ट करोगे 
आंख में डब डब होंगे आंसू
नज़र चुराओगे तुम मुझसे 
गलती से गर मिल गईं नज़रें
मेरी आंख में 
शायद कोई 
कंकड़ पड़ गया है देखो
कह कर बढ़ जाओगे आगे
तोतले लहजे में जब तुमको
बाबा कह कर बुलाएगा
कैसे तुम रिएक्ट करोगे 
जामिद ही होजाओगे 
या सीने से लिपटा लोगे
जीवन का वो सुन्दर लम्हा देखने को बेताब थी कब से
लेकिन अब जो वबा चली है
आने का इमकान नहीं है
बेटा मुझसे पूछ रहा है 
बाबा कब आयेंगे मामा
कैसे मै उसको समझाऊं
अभी भी शायद बाक़ी है 
कुछ मुद्दत बनवास की और
शबनम फ़िरदौस
२५/०५/२०

Tuesday, 13 October 2020

Ye kis disha me hum jarahe hain

یہ کس دشا میں ہم جا رہے ہیں 


دشا 
کل سکوں دل کو میرے ملا تھا
کہ وہ سب درندے جو قاتل تمہارے تھے مارے گئے ہیں 
مگر آج پھر سے 
نئی اک دشا کی خبر سن رہی ہوں 
تو پھر سے وہی خوف
 جو کنڈلی مارے مرے ذہن و دل میں بیٹھا ہوا تھا ، 
اٹھانے لگا سر 
دشا 
جب سے میں نے 
تمہاری خبر دیکھی تھی سرخیوں میں
مری آنکھوں سے نیند روٹھی ہوئی تھی 
وظیفے میں جتنے بھی پڑھتی مگر 
ایک لمحے کو مژگان میری 
 جھپکتی نہیں تھیں
اگر غلطی سے یہ جھپک بھی گئیں تو 
دکھائی مجھے دیتیں پریاں  کئی رقص کرتی ،
اداسی کے سر میں 
مرے کانوں میں گنگناتی ہوئی 
سرگوشی کرتیں  
مت جنم دینا کسی لڑکی کو تم 
اگر   کوئی غلطی سے لے جنم بھی  ،
  اپنے ہی ہاتھوں سے دفنا دو  پھر 
کہ  کوئی
دشا۔
نربھیا ،
آصفہ نہ بنے اب
یہ  بیٹی بچاؤ ،کہ بیٹی پڑھاؤ کے  نعرے ہیں بس  کھوکھلے ہی 
زباں خرچ ہیں سب 
دشا
تم بتاؤ 
یہ ہم کس دشا میں چلے جارہے ہیں
کہ ظلمت کے اشجار چاروں طرف ہیں 
اندھیرے میں رستے ہیں  ڈوبے ہوئے 
روشنی کی کرن آئے کیسے بھلا اب 
یہاں تو  مسیحا نہ آئے گا کوئی
 تمہیں بھی پتہ ہے 
کہ کوئی مسیحا درندے کو گر بھون دے گولیوں سے 
تو سولی پہ ہمت کو اس کی چڑھا دیتے ہیں
شبنم فردوس

ये किस दिशा में हम जारहे हैं

दिशा 
कल सुकुं दिल को मरे मिला था 
के वो सब दरिंदे जो क़ातिल तुम्हारे थे मारे गए है
मगर आज फिर से 
नई एक दिशा की खबर सुन रही हूं 
तो फिर से वही खौफ 
जो कुंडली मारे मेरे ज़हनो दिल में बैठा हुआ था
उठाने लगा सर
दिशा
जब से मैंने 
तुम्हारी खबर देखी थी सुर्खियों में 
मेरी आंखों से नींद रूठी हुई थी 
वजीफे मै जितने भी पढ़ती मगर
एक लम्हे को मिसगान मेरी
झपकती नहीं थीं
अगर गलती से ये झपक भी गईं तो
दिखाई मुझे देतीं परियां कई
रक्स करती
उदासी के सुर में 
मेरे कानो में गुनगुनाती हुई
सर्गोशी करतीं
मत जन्म देना किसी लड़की को तुम
अगर कोई गलती से ले जन्म भी 
अपने ही हाथों से दफना दो फिर
के कोई 
दिशा
निर्भया 
आसिफा ना बने अब
ये बेटी बचाओ के बेटी पढ़ाओ के नारे है बस खोखले ही 
ज़ुबान खर्च हैं सब
दिशा 
तुम बताओ 
ये हम किस दिशा में चले जारहे हैं
के ज़ुल्मत के अशजार चारों तरफ हैं 
अंधेरे में रस्ते हैं दुबे हुए 
रोशनी की किरण आए कैसे भला अब 
तुम्हे भी पता है
के कोई मसीहा दरिंदे को गर भून से गोलियों से 
तो सुली पे हिम्मत को उसकी चढ़ा देते हैं 

शबनाम फ़िरदौस

‎اب ‏اتر ‏آؤ ‏نیچے

اب اتر آو نیچے


سنو !
 اب اتر آو نیچے 
ہواؤں میں 
کب تک 
یوں اڑتے پھرو گے 
ہوا اپنا رخ کب بدل لے 
تمہیں کب پٹخ دے 
بھروسہ نہیں ہے 
بہت تم نے کرلی ہے منمانی اپنی 
اترتے ہو
یا پھر اتاروں تمہیں میں
  
سنبھل کر
سنبھل کر 
ذرا ہولے ہولے 
رکھو پیر اپنا 
اگر جا سے بے جا 
دھرا پیر تم نے 
گرو گے ،
بکھر جاؤگے کرجیوں میں
 ملو گے نہ پھر تم کہیں ڈھونڈنے پر 
ہوائیں  
 اڑا کر 
کہاں لے کے جائیں 
کسے یہ پتہ ہے
چلو !
 اب اتر آو نیچے
 شبنم فردوس

अब उतर आओ नीचे

सुनो !
अब उतर आओ नीचे
हवाओं में
 कब तक 
यूं उड़ते फिरोगे 
हवा अपना रुख कब बदल ले 
तुम्हे कब पटक दे 
भरोसा नहीं है
बहुत तुमने करली है मनमानी अपनी
उतरते हो
 या फिर उतारूं तुम्हे मै


संभल कर
 संभल कर
ज़रा होले होले 
रखो पैर अपना 
अगर जा से बेजा 
धरा पैर तुमने 
गिरोगे
बिखर जाओगे किर्चियों में
मिलोगे ना फिर तुम कहिं  ढूंढने पर
हवाएं 
उड़ा कर
कहां लेके जाएं 
किसे ये पता है
चलो !
अब उतर आओ नीचे 

शबनम फ़िरदौस

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Wednesday, 7 October 2020

‎تلاش ‏، ‏سکون ‏، ‏तलाश ‎, ‏सुकून ‎

تلاشِ_ سکوں

سکونِ دل 
تجھے میں نے 
کہاں کس جا ، نہیں ڈھونڈا 
کبھی اس جا کبھی اس جا
بھٹکتی ہی رہی میں تو 
کبھی یاروں کی محفل میں   
کبھی تو کشت_ویراں میں
کبھی سر سبز جنگل میں 
کبھی مندر کی سیڑھی پر
کبھی مسجد کی چوکھٹ پر
کبھی گرجا گھروں میں بھی
رہی میں منتظر  تیری 
گزر شاید وہاں سے ہو 
وہاں لیکن نہ آیا تو
کہا رستے  نے  تنگ آ کر
مسلسل چل رہی ہو تم 
یونہی کب تک چلو گی یار
 اب  گھسنے لگا ہوں میں 
ذرا کچھ پل کو تو ٹھہرو 
مجھے آرام کرنے دو 
بھری اک  آہ میں نے اور
کہا پھر
 یارِ من تو سن 
ملے گا  وہ نہیں جب تک
یونہی چلتی رہوں گی میں 
مگر  تو کہہ رہا ہے تو
ٹھہر جاتی ہوں پل دو پل 
یہ کہہ کر آنکھ اپنی موند لی میں نے
تبھی اک نقرئی آواز کانوں کو سنائی دی 
سنو نادان لڑکی تم 
بھٹکتی پھر رہی ہو کیوں
نہیں تم کو پتہ لیکن  
 تمہارے پاس ہی میں  ہوں  
تمہارے ساتھ چلتا ہوں
بتاؤ تو مجھے لڑکی    
 کسی بھوکے کی تھالی میں 
کبھی کھانا پروسا ہے ؟
کسی مفلس کے خوابوں میں 
بھرے ہیں رنگ  بھی تم نے ؟ 
کبھی  بے نور آنکھوں میں 
 جلائی شمع  بھی تم نے محبت کی  ؟
کبھی روتے ہوئے انساں کو بھی تم نے 
ہنسایا ہے ؟
کسی بوڑھے کے کندھے کا 
سہارا بن کے دیکھا ہے ؟ 
کبھی  کر کے یہ  دیکھو تم 
مجھے تسخیر کر لو گی  
کھلی جو آنکھ میری ہڑبڑا کر تو 
وہاں کوئی کہیں نہ تھا 
عجب خاموشی تھی ہر سو
شبنم فردوس

तलाशे सुकून

सुंकुने दिल
 तुझे मैंने 
कहां किस जा , नही ढूंढ़ा
कभी इस जा , कभी उस जा
भटकती ही रही मै तो
कभी यारों की महफ़िल में
कभी तो किश्ते विरां में
कभी सर सब्ज जंगल में 
कभी मंदिर की सीढ़ी पर 
कभी मस्जिद की चौखट पर 
कभी गिरजा घरों में भी 
रही मै मुन्तजिर तेरी
गुज़र शायद वहां से हो
वहां लेकिन ना आया तू
कहा रस्ते ने तंग आकर
मुसलसल चल रही हो तुम
यूंही कब तक चलोगी यार 
अब घिसने लगा हूं मैं
ज़रा कुछ पल को तो ठहरो 
मुझे आराम करने दो
भरी एक आह मेंने और 
कहा फिर
यारे मन तू सुन

मिलेगा वो नहीं जब
तक 
यूंही चलती रहूंगी में
मगर तू कह रहा है तो 
ठहर जाती हूं पल दो पल
ये कहकर आंख अपनी मूंद ली मैंने
तभी एक नुकरई आवाज़ कानों को सुनाई दी
सुनो नादान लड़की तुम
भटकती फिर रही हो  क्यों
नहीं तुमको पता लेकिन
तुम्हारे पास ही में हूं
तुम्हारे साथ चलता  हूं
बताओ तो मुझे लड़की
किसी भूके की थाली में 
कभी खाना परोसा है ?
कसी मुफलिस के ख्वाबों में 
भरे हैं रंग भी तुमने ?
कभी बेनूर आंखों में 
जलाई शम्मा भी तुमने मोहब्बत की?
कभी रोते हुए इंसा को भी तुमने 
हंसाया है ?
किसी बूढ़े के कंधे का 
सहारा बनके देखा है ?
कभी करके ये देखो तुम
मुझे तस्खीर कर लोगी 
खुली जो आंख मेरी हड़बड़ा कर तो
वहां कोई कहीं ना था
अजब खामोशी थी हर सू
शबनम फ़िरदौस

Search for the comfort


The relief of the heart 
Where  did I  not look for you ?
Sometimes here  sometimes there
I kept on wandering
Sometimes in the company of friends
Sometimes in the  barren land 
Sometimes in the green forest 
Sometimes on the stairs of the Temple 
Sometimes on the door of the Mosque 
Sometimes  in the Church 
I kept on waiting 
Maybe you would pass by 
But you didn't come 
The road told me  annoyingly 
You are continuously walking  
How long will you  walk like this , my dear ?
I am getting worn
Plz stay for a while 
Let me take some rest 
I sighed and said
Listen to me  ,my dear 
I will keep on walking 
Untill i get him 
But if you are telling 
I stay for some moments 
Saying this as I  closed my eyes ,
I heard a silvered voice 
Listen ! silly  girl
Why are you wandering ?
Perhaps you don't know 
I am with you 
I walk with you.
Tell me , the baby 
Have you ever served meals
In the plate of a hungry man ?
Have you ever filled colours
In dreams of a poor man?
Have you ever lit the candle of love 
In blind eyes ?
Have you ever made a crying man laugh
Have you ever shared 
The burden of an old man 's shoulders?
Do these things 
And watch 
You will conquer  me
When I  hurriedly woke up 
There was not a
 single person
A strange silence was there

Shabnam firdaus

Sunday, 4 October 2020

moon, ‏pain ‎, چاند ، ‏ٹیس ‏

اے چاند ذرا ان سے کہنا

اے چاند  ذرا کہنا ان سے 
جو دور بہت جا بیٹھے ہیں !
کوئی ان سے ملنے کی خاطر 
ہر روز ندی پر آتی ہے !
آنکھوں میں لئے امید کے دئے 
پہروں بیٹھی رہتی ہے !
تھک ہار کے جب وہ جاتی ہے 
آنکھوں کے دئے بجھ جاتے ہیں ,
سینے میں ٹیس ابھرتی ہے !
اے چاند تو ان سے کہنا کہ 
دیر کریں نہ آنے میں 
ورنہ دیر بہت ہو جائگی!
شبنم فردوس

ए चांद ज़रा उनसे कहना

 ए चांद ज़रा कहना उनसे 
जो दूर बहूत जा बैठे हैं
कोई उनसे मिलने की खातिर 
हर रोज़ नदी पर आती है 
आंखो में लिए उमीद के दिए
पहरों बैठी रहती है
थक हार के जब वो जाती है
आंखों के दिए बुझ जाते है
सीने में टीस उभरती है
ए चांद तू उनसे कहना के 
देर करें न आने में 
वरना देर बहुत होजाएगी
शबनम फ़िरदौस

O ' moon please tell him 
Who is gone  away
Someone to meet him
Comes to the river everyday.
Having a candle of hope in her eyes,
She sits there for a long time.
After getting tired 
When she goes back, 
The candle in the eyes turns off.
She feels a twinglin pain in her heart ।
O' moon please tell him
Not to be late 
Otherwise it will be too late, 
Shabnam firdaus

Friday, 2 October 2020

Imprisonment

 حبس


اجاڑ  سڑکیں 
اجاڑ گلیاں 
گھنی خموشی
فضا میں
 بکھری ہوئی ہے ہر سو
فلک میں اڑتے ہوئے
 پرندوں کو
 حسرتوں سے میں  دیکھتی ہوں


ابھی تو چالیس دن بھی 
گزرے نہیں ہیں اپنے 
کہ دم ہمارا 
لگا ہے گھٹنے 
عجیب وحشت 
ہمارے سینے میں چیختی ہے


تو کیسے تم نے 
گزاری ہوگی
وہ۔لمبی مدت 
گھروں میں اپنے
اسیر ہو کر
شبنم فردوس
28/05/20


हब्स

उजाड़ सड़कें
उजाड़ गलियां
घनी खमोशी
फिजा में 
बिखरी हुई है हर सू
फ़लक में उड़ते हुए
परिंदों को
हसरतों से  मैं देखती हूं

उभी तो चालीस  दिन भी 
गुज़रे नहीं है अपने
के दम हमारा
लगा है घुटने
अजीब वहशत 
हमारे सीने में चीखती है

तो कैसे तुमने
गुज़ारी होगी
वो लम्बी मुद्दत
घरों में अपने
असीर होकर

शबनम फ़िरदौस
28/05/20

Imprisonment

Desolated roads
Disolated streets,
Deep silence 
In the atmosphere is scattered all around.
I have a longing look 
At the birds flying in the sky.

Not even the forty days 
Have  yet passed ,
We feel suffocated
A strange fear
Screams in our heart.

Then how would've you spent
That long period 
Being confined in your home ?

Shabnam firdaus
28/05/20

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